विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस
मौसम परिवर्तन के साथ ही परो वायरस (Parvo Virus) का खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है। इस वर्ष भी यह जानलेवा वायरस कुत्तों के पिल्लों पर भारी पड़ रहा है। बैकुंठपुर नगर क्षेत्र के बाल मंदिर में बीते तीन दिनों के भीतर 8 पिल्लों की मौत हो चुकी है, जिससे पशुपालकों और स्थानीय नागरिकों में चिंता का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, परो वायरस मुख्य रूप से छोटे पिल्लों को अपनी चपेट में लेता है। संक्रमित पिल्लों में लगातार दस्त होना, शरीर का सुस्त पड़ जाना, कमजोरी और भूख न लगना प्रमुख लक्षण बताए जा रहे हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी तेजी से जानलेवा साबित होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां पालतू कुत्तों के पिल्लों की देखरेख और उपचार के कारण कुछ की जान बचाई जा रही है, वहीं लावारिस पिल्लों के लिए यह वायरस मौत का कारण बन रहा है। नगर के विभिन्न मोहल्लों में बीते चार दिनों के भीतर 8 पिल्लों की मौत हो चुकी है और आगे भी इस बीमारी के फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
चिंता की बात यह है कि पशु चिकित्सा विभाग की ओर से अब तक इस वायरस की रोकथाम को लेकर कोई विशेष दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं और न ही व्यापक स्तर पर टीकाकरण या जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से रोकथाम और उपचार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, परो वायरस केवल कुत्तों के पिल्लों के लिए ही नहीं, बल्कि बकरियों सहित अन्य पशुओं के लिए भी घातक साबित हो सकता है। ऐसे में समय रहते सतर्कता और टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
नगरवासियों ने पशु चिकित्सा विभाग से अपील की है कि प्रभावित क्षेत्रों में टीम भेजकर स्थिति का सर्वे कराया जाए, लावारिस पिल्लों के उपचार की व्यवस्था की जाए तथा लोगों को इस वायरस के लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए, ताकि आगे होने वाली संभावित मौतों को रोका जा सके।


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