विशाल सिंह / कोरिया एक्सप्रेस
कोरिया। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, कोरिया जिला इकाई के अध्यक्ष का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। अध्यक्ष चयन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि खबर सामने आने के बाद संघ के प्रांताध्यक्ष ने 31 जनवरी को कोरिया आने से ही इनकार कर दिया है। इससे संगठन के भीतर असमंजस और अस्थिरता की स्थिति बन गई है।
इधर, एक बाबू हर हाल में जिला अध्यक्ष बनने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। सूत्रों का कहना है कि बाबू का मकसद अध्यक्ष पद की आड़ में प्रशासनिक संरक्षण हासिल करना है, ताकि उस पर लंबित या भविष्य में संभावित जांच और कार्रवाई से बचा जा सके। इसी आशंका को लेकर संघ के ईमानदार कर्मचारियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
कर्मचारियों का साफ कहना है कि जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हों, यदि उसे संगठन की कमान सौंपी गई तो संघ की साख को भारी नुकसान पहुंचेगा। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के भीतर ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कर्मचारियों का दावा है कि यदि बाबू को जिला अध्यक्ष बनाया गया, तो लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारी इस संघ को छोड़कर अन्य संगठनों में शामिल हो जाएंगे।
बताया जा रहा है कि प्रदेश में इस संघ के अलावा तीन अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी संघ सक्रिय हैं, जिनमें जाने की तैयारी कई सदस्य कर चुके हैं। कर्मचारियों का मानना है कि जांच के घेरे में रहे व्यक्ति को पद मिलने से न सिर्फ संगठन कमजोर होगा, बल्कि संघ का अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि 31 जनवरी के बाद कोरिया जिला इकाई की कमान किसके हाथों में जाएगी और क्या संगठन नेतृत्व समय रहते हालात को संभाल पाएगा, या फिर यह विवाद संघ के टूटने की बड़ी वजह बन जाएगा।

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