विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस
बैकुंठपुर। कोरिया जिले के चित्तमारपारा स्थित मंगला राइस मिल में हुई कथित अनियमितताओं के मामले में तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। मामले में अब तक ठोस निष्कर्ष और जिम्मेदारों पर व्यापक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018-19 में बंद पड़ी मंगला राइस मिल में पटना धान खरीदी केंद्र सहित दो अन्य खरीदी केंद्रों से धान का उठाव दर्शाया गया था। रिकॉर्ड के मुताबिक, उक्त धान के एवज में राइस मिल द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को कुल 64,320 क्विंटल चावल जमा कराया जाना था।
हालांकि 1 नवंबर 2023 तक मात्र 289.8 क्विंटल चावल ही जमा होना बताया गया, जबकि आज दिनांक तक लगभग 64,030.2 क्विंटल चावल जमा होना शेष बताया जा रहा है। मामले की शिकायत और अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन ने राइस मिल को सील कर दिया था तथा प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राइस मिल बंद थी, तब आखिर किस आधार पर विभिन्न धान खरीदी केंद्रों से लगातार धान उठाव दर्शाया जाता रहा। क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया था यदि भौतिक सत्यापन किया गया था, तो इतनी बड़ी मात्रा में धान और चावल का हिसाब अब तक स्पष्ट क्यों नहीं हो पाया?
यदि पूरा खेल केवल कागजों में हुआ है, तो फिर सिर्फ राइस मिल संचालक ही नहीं, बल्कि संबंधित धान खरीदी केंद्रों के प्रबंधक और भौतिक सत्यापन करने वाले अधिकारी भी जांच के दायरे में आने चाहिए। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि करोड़ों रुपये की धान और चावल की हेराफेरी का मामला कहीं सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित होकर न रह जाए।
लोगों का कहना है कि केवल राइस मिल को सील कर देने भर से सरकार को हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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