ग्राम पंचायत खोड में समर्सिबल पंप खरीदी को लेकर बड़ा विवाद, भ्रष्टाचार से इनकार करना ग्राम सचिव को पड़ा भारी, बिना जांच हुआ निलंबन

             विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस


बैकुण्ठपुर। जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत खोड में सबमर्सिबल पंप का समर्सिबल पंप स्थापना के नाम पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच बोर में समर्सिबल पंप लगाने के लिए बाजार मूल्य से लगभग दोगुनी दर पर बिल लगाकर शासकीय राशि निकालने का दबाव ग्राम पंचायत सचिव पर बनाया गया, लेकिन सचिव द्वारा सहमति न देने पर उनके खिलाफ बिना जांच के निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाजार में 1 एचपी दस स्टेज का समर्सिबल पंप लगभग 13,500 रुपये में उपलब्ध है, जबकि एक भाजपा नेता द्वारा 25,500 रुपये प्रति पंप का बिल तैयार किया गया। इस प्रकार पांच पंपों के नाम पर करीब 2 लाख 80 हजार रुपये आहरित कराने का दबाव ग्राम पंचायत सचिव पर बनाया गया। आरोप है कि भाजपा के कई नेताओं द्वारा लगातार दबाव डाला गया, लेकिन ग्राम पंचायत सचिव ने नियमों का हवाला देते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने से साफ इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार समर्सिबल पंप का बिल जिस भाजपा नेता के नाम पर था, उसी नेता सहित अन्य भाजपा नेताओं द्वारा 4 दिसंबर 2026 को शिकायत की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत की न तो लिखित प्रति सामने आई और न ही किसी प्रकार की प्रारंभिक जांच की गई। इसके बावजूद प्रभारी मंत्री द्वारा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित किया जाए, और उसी दिन 4 दिसंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से सचिव को निलंबित कर दिया गया। 


स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि स्थानीय विधायक की मंशा भ्रष्टाचार रोकने की थी और उन्होंने मामले को गंभीरता से लेने का संकेत भी दिया था, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। सूत्र यह भी बताते हैं कि शिकायत के आधार पर न तो जांच दल गठित हुआ और न ही सचिव का पक्ष सुना गया, जो प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाजार मूल्य 13,500 रुपये है, तो 25,500 रुपये का बिल कैसे और किस आधार पर लगाया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यह भी आरोप है कि बाजार मूल्य से दो गुने दाम पर समर्सिबल पंप उपलब्ध कराने का प्रयास भाजपा नेता द्वारा किया जा रहा था, जिसका विरोध ग्राम पंचायत सरपंच, पंच और ग्राम पंचायत सचिव तीनों कर रहे थे। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी भ्रष्टाचार का विरोध करता है और उसे ही सजा दी जाती है, तो इससे गलत संदेश जाता है। पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाली व्यवस्था में इस तरह की कार्रवाई से ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल टूटता है। अब यह मामला केवल समर्सिबल पंप खरीदी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव का प्रतीक बन गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, समर्सिबल पंप खरीदी से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यदि ग्राम पंचायत सचिव ने नियमों के तहत कार्य किया है तो उन्हें तत्काल बहाल किया जाए। साथ ही यदि कहीं भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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