विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस
बैकुंठपुर (कोरिया): 10 जनवरी 2026 जिला कांग्रेस कार्यालय 'राजीव भवन' में आज मनरेगा के अस्तित्व को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा की वैधानिक गारंटी को खत्म करने का प्रयास ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने और गरीबों को बड़ी क्षति पहुंचाने वाला कदम बताया ।
प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से पत्रकार वार्ता के प्रभारी व पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश गुप्ता, 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान की शुरुआत की
प्रेस वार्ता प्रभारी राकेश गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (मनरेगा) महज एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को सम्मान से जीने का अधिकार देने वाला कानून है। इस कानून के तहत प्रत्येक परिवार को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी प्राप्त है और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। लेकिन वर्तमान सरकार इसके ढांचे को बदलकर इसकी आत्मा को खत्म कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने आंकड़ों के साथ बताया कि पहले केंद्र सरकार मनरेगा का 90 प्रतिशत खर्च वहन करती थी, जबकि राज्यों का हिस्सा मात्र 10 प्रतिशत था। अब नए नियमों के तहत केंद्र ने अपना हिस्सा घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया है और राज्यों पर 40 प्रतिशत का भारी बोझ डाल दिया है। यह जानते हुए भी कि अधिकांश राज्य कर्ज में डूबे हैं, ऐसा करना इस योजना को बंद करने की एक सोची-समझी साजिश है। इससे निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण होगा और पंचायतों की भूमिका खत्म हो जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि
ग्रामीण भारत में बढ़ती बेरोजगारी, पलायन और गरीबी को देखते हुए कांग्रेस कार्यसमिति ने 10 जनवरी से 26 फरवरी 2026 तक “मनरेगा बचाओ संग्राम” नामक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना और बजट में कटौती करना भाजपा की नकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है।
प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस ने सरकार के सामने अपनी चार सूत्रीय प्रमुख मांगें रखीं, जिन्हें लेकर वे जनता के बीच जाएंगे। काम, मजदूरी और जवाबदेही की पूर्ण गारंटी: सरकार यह सुनिश्चित करे कि रोजगार मांगना गरीबों का संवैधानिक अधिकार बना रहे। इसमें किसी भी प्रकार की कटौती न हो और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।नए बदलावों की तत्काल वापसी: केंद्र सरकार द्वारा फंडिंग पैटर्न (60:40) में किए गए बदलावों और अन्य तकनीकी बाधाओं को तुरंत वापस लिया जाए ताकि राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।संवैधानिक अधिकार की बहाली: ग्राम सभाओं और पंचायतों को उनके पुराने अधिकार वापस दिए जाएं। मनरेगा को पूरी तरह से अधिकार-आधारित स्वरूप में ही संचालित किया जाए, न कि इसे सरकार की 'कृपा' बनाया जाए। न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये: बढ़ती महंगाई को देखते हुए कांग्रेस ने मांग की है कि मनरेगा श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन की जाए, ताकि एक गरीब परिवार अपना गुजर-बसर सम्मान के साथ कर सके।

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