विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस
स्नेक मैन सत्यम की पहल से बची वन्यजीव की जान, पेट मेडिक्स के संचालक डॉ. पियूष दुबे ने की सर्जरी
वन्यजीव संरक्षण और सरीसृप चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। अजगर के मुंह में बनी गांठ को निकालने के लिए साढ़े तीन घंटे तक सर्जरी की गई। स्नेक मैन सत्यम की पहल पर शुरू हुआ उपचार का सफर अंबिकापुर से बिलासपुर तक पहुंचा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से अजगर का ऑपरेशन किया गया।
जानकारी के अनुसार, अजगर के मुंह में गांठ बनने के बाद उसके उपचार के लिए प्रयास शुरू किए गए। बेहतर इलाज की आवश्यकता को देखते हुए कानन पेंडारी के विशेषज्ञों ने अजगर को आगे के उपचार के लिए रेफर किया। इसके बाद बिलासपुर में पेट मेडिक्स के संचालक डॉ. पियूष दुबे ने सर्जरी कर अजगर के मुंह से गांठ निकाली।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद अजगर को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में स्नेक मैन सत्यम की पहल को अहम माना जा रहा है, जिनके प्रयासों से वन्यजीव को उपचार उपलब्ध कराने का रास्ता बना।
इस घटना को वन्यजीव संरक्षण और सरीसृपों के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, अजगर के मुंह से निकाली गई गांठ के कैंसरग्रस्त होने तथा इसे देश में अपनी तरह की पहली सर्जरी बताए जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय जानकारी सामने आने के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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