लाखों की लागत से बना शहरी गोठान बना शोपीस, कचरे में भोजन ढूंढ रहे गौवंश


 विशाल सिंह / कोरिया एक्सप्रेस 

नगर पालिका बैकुंठपुर द्वारा लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया शहरी गोठान इन दिनों उपयोग के अभाव में वीरान पड़ा हुआ है। स्थिति यह है कि जहां गौवंश को रखने की व्यवस्था की जानी थी, वहां फलदार पौधों का पौधरोपण कर दिया गया है। इसके चलते गोठान में मवेशियों को रखने की कोई व्यवस्था नहीं बन पाई है।

गोठान के उपयोग में नहीं आने के कारण सैकड़ों की संख्या में गौवंश गोठान से लगे गेज नदी के मैदान में भटकते नजर आ रहे हैं। यही स्थान शहर का प्रमुख कचरा डंपिंग स्थल भी बन गया है। ऐसे में मवेशी कचरे के ढेर में भोजन तलाशते हुए प्लास्टिक सहित अन्य अपशिष्ट खाने को मजबूर हो रहे हैं।

मामले को लेकर गौसेवक अन्नू दुबे ने बताया कि जिस जगह शहर का कचरा फेंका जाता है, वहीं बड़ी संख्या में गौवंश घूमते रहते हैं और कचरे के बीच से भोजन खोजते हैं। उन्होंने बताया कि कचरा उड़कर गेज नदी में भी पहुंच रहा है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर गौवंश के लिए गोठान बनाया गया था, वहां फलदार पौधे लगा दिए गए हैं, जिससे मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो गया है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन और नगर पालिका को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

जानकारी के मुताबिक नगर पालिका ने तलवापारा में नगर सैनिक कार्यालय के सामने शहरी गोठान का निर्माण कराया था, लेकिन फिलहाल वहां किसी भी प्रकार की गौवंश व्यवस्था नहीं की जा रही है। इसके चलते मवेशी सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में भटकते हुए कचरा खाने को मजबूर हैं।

बताया जाता है कि हाल ही में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले जनपद पंचायत बैकुंठपुर और नगर पालिका के अधिकारियों ने मवेशियों को भाड़ी स्थित एक निजी गोठान में रखवाया था। हालांकि वहां चारे और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से कई मवेशियों की मौत हो गई। स्थिति बिगड़ने पर बाद में मवेशियों को वहां से छोड़ना पड़ा।

स्थानीय लोगों और गौसेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहरी गोठान का समुचित उपयोग करते हुए गौवंश के लिए सुरक्षित और उचित व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें कचरे के ढेर में भोजन तलाशने को मजबूर न होना पड़े

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