नियमों और धाराओं के विपरीत प्रशिक्षु नायब तहसीलदार को प्रभारी तहसीलदार बनाए जाने पर उठे सवाल “खलासी को दे दी ड्राइवर सीट” — प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न ।

 


विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस 

कोरिया जिले में एक प्रशिक्षु नायब तहसीलदार को प्रभारी तहसीलदार का प्रभार दिए जाने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और वैधानिक प्रावधानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासनिक और राजस्व हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशिक्षण अवधि में पदस्थ अधिकारी को तहसीलदार जैसे महत्वपूर्ण राजस्व एवं न्यायिक पद का दायित्व सौंपा जा सकता है।


राजस्व मामलों के जानकारों के अनुसार, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 11, 12 एवं 13 में राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति, शक्तियों और अधिकारों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इन धाराओं के तहत तहसीलदार और नायब तहसीलदार के अधिकार पृथक-पृथक निर्धारित किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सक्षम प्राधिकारी की विधिवत अधिसूचना और नियमित नियुक्ति के बिना किसी प्रशिक्षु अधिकारी को पूर्ण तहसीलदार के अधिकार देना भविष्य में विधिक विवाद का कारण बन सकता है।

जानकार यह भी बताते हैं कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रशासनिक नियमों के अनुसार प्रशिक्षण अवधि में अधिकारियों को सामान्यतः पर्यवेक्षणाधीन कार्य ही सौंपे जाते हैं। ऐसे में किसी प्रशिक्षु अधिकारी को प्रभारी तहसीलदार बनाकर राजस्व न्यायालयीन प्रकरणों की सुनवाई कराना कई सवाल खड़े कर रहा है।

अधिवक्ताओं ने जताई चिंता

स्थानीय अधिवक्ताओं और राजस्व प्रकरणों से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि प्रशिक्षु अधिकारी द्वारा पारित आदेशों को भविष्य में न्यायालय में चुनौती दी जाती है, तो उनके वैधानिक अधिकार क्षेत्र को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा तथा अन्य राजस्व न्यायालयीन मामलों में पारित आदेश प्रभावित हो सकते हैं।

वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जिले में अधिकारियों की कमी के कारण अस्थायी व्यवस्था के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संबंधित अधिकारी को सीमित अधिकार दिए गए हैं या पूर्ण तहसीलदार के अधिकारों के साथ प्रभार सौंपा गया है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि शासन को इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद उत्पन्न न हो।

जनदर्शन में भी पहुंची शिकायत

बताया जा रहा है कि संबंधित प्रशिक्षु नायब तहसीलदार के खिलाफ जनदर्शन में भी शिकायत की गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर मामला अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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