विशाल सिंह / कोरिया एक्सप्रेस
अप्रैल माह में अधिकारियों के निर्देशानुसार शिक्षकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना सर्वे कार्य किया गया था। सर्वे के दौरान हितग्राहियों से विभिन्न योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर निर्धारित प्रपत्रों में दर्ज की गई तथा उसे ऑनलाइन भी अपलोड किया गया।
सर्वे में मुख्य रूप से यह जानकारी ली गई थी कि क्या ग्रामीण नागरिक जल जीवन मिशन के तहत उपलब्ध कराए जा रहे पानी का उपयोग कर पा रहे हैं तथा क्या स्वच्छता अभियान के अंतर्गत बनाए गए शौचालयों का नियमित उपयोग हो रहा है या उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को मिल रहा है या नहीं ।
सर्वे के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरिया जिले में लगभग 75 प्रतिशत हितग्राहियों द्वारा पानी एवं शौचालय के उपयोग को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं बताई गई थी। शिक्षकों ने हितग्राहियों से मिली जानकारी को सही रूप में प्रपत्रों में दर्ज करते हुए ऑनलाइन अपडेट भी कर दिया।
अब आरोप लगाया जा रहा है कि जिला प्रशासन की ओर से संबंधित शिक्षकों पर मौखिक दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपनी आईडी से दोबारा लॉगिन कर सर्वे आंकड़ों में सुधार करें और यह दर्शाएं कि शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को सही तरीके से मिल रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर शिक्षकों में नाराजगी और रोष का माहौल देखा जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने हितग्राहियों द्वारा दी गई वास्तविक जानकारी के आधार पर सर्वे कार्य पूरा किया था, ऐसे में आंकड़ों में बदलाव करना उचित नहीं होगा।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


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