विशाल सिंह / कोरिया एक्सप्रेस
बैकुंठपुर नगर पालिका की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। यहां कचरे का उचित निस्तारण करने के बजाय उसे खुले में जलाया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है ।नगर पालिका क्षेत्र में जगह-जगह कचरे के ढेर को आग के हवाले किया जा रहा है। खासकर प्लास्टिक कचरा जलने से जहरीला धुआं उठ रहा है, जो लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। इतना ही नहीं, जलते हुए प्लास्टिक के अवशेष जानवरों के पैरों में चिपक रहे हैं, जिससे वे घायल हो रहे हैं और उन्हें संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
बताया जा रहा है कि नगर पालिका में 100 से अधिक सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात बद से बदतर बने हुए हैं। सूत्रों की मानें तो कई कर्मचारी केवल हाजिरी लगाकर गायब हो जाते हैं, जिससे सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरा जलाने से सांस लेने में दिक्कत हो रही है और बच्चों व बुजुर्गों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो आखिर कचरे को जलाना कहां तक उचित है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर यूं ही लोगों की सेहत और जानवरों की जिंदगी खतरे में डालते रहेंगे?



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