जिल्दा खाद घोटाले में कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल क्या जिले की अन्य सहकारी समितियों की भी होगी जांच?


विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस 

बैकुंठपुर, कोरिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कोरिया आगमन से पहले प्रशासन ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जिल्दा में सामने आए 246.75 मीट्रिक टन खाद घोटाले के मामले में कार्रवाई तेज करते हुए समिति के प्रबंधक अखिलचंद्र के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए थे। यह कार्रवाई जनदर्शन में मिली शिकायत के आधार पर की गई।इसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा कोरिया, एमसीबी और सूरजपुर जिले की समीक्षा बैठक के दौरान सहायक पंजीयक सहकारिता आयुष प्रताप सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन जिले में पूर्व में सामने आए अन्य कथित घोटालों की फाइलें अब भी धूल खाती नजर आ रही हैं।जिले में चर्चित पटना स्थित मंगला राइस मिल मामले में करोड़ों रुपये के धान घोटाले को लेकर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन सहकारी समितियों से बंद पड़ी मंगला राइस मिल में डीओ काटा जा रहा था, उस दौरान राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया गया था या नहीं। यदि सत्यापन हुआ था तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।

करीब चार वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रशासन बड़ी मात्रा में गायब हुए धान का स्पष्ट पता नहीं लगा पाया है। इसी तरह गिरजापुर में एक निजी मकान से 50 हजार से अधिक वारदाना मिलने का मामला भी सीमित जांच तक सिमट कर रह गया। उस प्रकरण में भी अब तक किसी प्रकार की ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।

जिल्दा सहकारी समिति में हुई कार्रवाई के बाद अब जिले की अन्य सहकारी समितियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जिले में संचालित अन्य 22 सहकारी समितियों में खाद वितरण और भंडारण व्यवस्था की जांच की मांग तेज हो रही है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या खाद का खेल केवल जिल्दा तक सीमित था या अन्य समितियों में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं हुई हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस कार्रवाई को केवल एक मामले तक सीमित रखता है या पूरे जिले की सहकारी समितियों की व्यापक जांच कर जवाबदेही तय करता है।

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