विशाल सिंह/ कोरिया एक्सप्रेस
ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और साफ-सुथरा बनाने के उद्देश्य से लगभग तीन वर्ष पूर्व प्रत्येक ग्राम पंचायत में डोर-टू-डोर जाकर सूखा एवं गीला कचरा संग्रहण करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर कचरा रिक्शा उपलब्ध कराए गए थे। शासन की मंशा थी कि गांवों में नियमित कचरा संग्रहण हो और स्वच्छता अभियान को मजबूती मिले, लेकिन कोरिया जिले में यह योजना अब केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में आज तक डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का कार्य शुरू ही नहीं हो पाया, जबकि पंचायत मद से कचरा रिक्शों की खरीदी कर ली गई थी। उपयोग और रखरखाव के अभाव में ये रिक्शे अब धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।
ताजा मामला बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़ीझरिया का सामने आया है। यहां पंचायत भवन परिसर में लंबे समय से पड़े दो कचरा रिक्शे पूरी तरह जर्जर होकर कबाड़ की स्थिति में पहुंच चुके हैं। रिक्शों की हालत देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनके रखरखाव और उपयोग को लेकर पंचायत स्तर पर गंभीरता नहीं बरती गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायत के सरपंच और सचिव समय रहते इस ओर ध्यान देते, तो जनता के टैक्स के पैसे से खरीदे गए लाखों रुपए के इन रिक्शों को खराब होने से बचाया जा सकता था। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
स्वच्छता अभियान के नाम पर किए गए खर्च और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर अब सवाल खड़े कर रहा है। शासन की योजनाएं गांवों तक पहुंच तो रही हैं, लेकिन निगरानी और क्रियान्वयन के अभाव में उनका उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा।


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