पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, फिर किसानों को क्यों लगाने होंगे एसडीएम कार्यालय के चक्कर ?


 विशाल सिंह / कोरिया एक्सप्रेस 

कोरिया। जिला प्रशासन का दावा है कि जिले में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। इसके बावजूद कृषि कार्यों के लिए डिब्बों में डीजल लेने वाले किसानों को एसडीएम से अनुमति लेने की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

जिला खाद्य अधिकारी नटवर सिंह राठौर ने कहा है कि अफवाहों के चलते लोग अतिरिक्त मात्रा में पेट्रोल-डीजल का संग्रह कर रहे हैं, इसलिए डिब्बों और बोतलों में ईंधन बिक्री पर रोक लगाई गई है। हालांकि कृषि कार्यों के लिए जरूरतमंद किसानों को आवेदन और जांच के बाद एसडीएम की अनुमति से डीजल उपलब्ध कराया जाएगा।

यहीं सवाल खड़ा होता है कि जब जिले में ईंधन की कोई कमी नहीं है, तो किसानों को अपनी जरूरत के डीजल के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर क्यों लगाने पड़ेंगे? खेती के मौसम में यह प्रक्रिया किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन सकती है।

किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन को यह लगता है कि कुछ लोग अवैध रूप से पेट्रोल-डीजल का भंडारण कर रहे हैं, तो ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन प्रशासन अपनी व्यवस्था की कमियों का बोझ किसानों पर डालते हुए ऐसा कदम उठा रहा है, जिससे ईमानदार और जरूरतमंद किसान भी प्रभावित होंगे।

किसानों का तर्क है कि खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में उन्हें अपना समय खेतों में देना चाहिए, न कि डीजल प्राप्त करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने में। उनका कहना है कि अनुमति, जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया से कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं तथा किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि प्रशासन इस व्यवस्था को एहतियाती कदम और अनधिकृत भंडारण रोकने की कार्रवाई बता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों के बीच इसे लेकर असमंजस और नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।

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