विशाल सिंह / कोरिया एक्सप्रेस
कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर में मंगलवार शाम लगभग 5 बजे से बाधित हुई विद्युत आपूर्ति पूरी रात बहाल नहीं हो सकी। बिजली गुल रहने से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान विद्युत विभाग के अधिकारी लगातार बिजली जल्द चालू होने का आश्वासन देते रहे, लेकिन पूरी रात सप्लाई बहाल नहीं हो पाई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में तैनात कुछ कर्मचारी मौके पर उपलब्ध नहीं थे। कोई कर्मचारी अवकाश पर था तो कुछ कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी बंद बताए गए। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी स्वयं समय पर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं करा पा रहे हैं, तो इससे विभागीय समन्वय और व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर में पिछले लगभग चार माह से बिजली की आंख-मिचौली से आम जनता परेशान है। बरसात की पहली ही तेज बारिश ने विद्युत विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। बैकुंठपुर शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह विद्युत व्यवस्था की अव्यवस्था से लोग प्रभावित हैं।
लगातार चार माह की भीषण गर्मी के बाद लोग बारिश से राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब थोड़ी सी बारिश और तेज हवा चलते ही लोगों को बिजली कटने की चिंता सताने लगती है। शहरी क्षेत्रों में देर-सवेर बिजली आपूर्ति बहाल हो जाती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है। कई गांवों में बारिश के बाद कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सामने आती हैं, जबकि कुछ गांवों में सप्ताहभर तक बिजली नहीं रहने की स्थिति बन जाती है।
सबसे अधिक खराब स्थिति बैकुंठपुर से लगे कंचनपुर बेल्ट की बताई जा रही है। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इस क्षेत्र के करीब 35 गांव पिछले 48 घंटे से विद्युत आपूर्ति बाधित रहने के कारण गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल, मोबाइल चार्जिंग, घरेलू कार्य और छोटे व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इतना समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति अब तक बहाल नहीं हो सकी है, जिससे लोगों में विद्युत विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
विद्युत विभाग द्वारा गर्मी के मौसम में 11 केवी और 33 केवी लाइनों के रखरखाव तथा मरम्मत के नाम पर नियमित रूप से बिजली बंद रखी जाती है। उपभोक्ता यह सोचकर असुविधा सहन करते हैं कि बरसात के दौरान व्यवस्था सुचारु रहेगी, लेकिन पहली ही तेज बारिश में बिजली व्यवस्था चरमरा जाने से विभाग की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
अब क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि हर वर्ष बरसात से पहले व्यापक तैयारियां की जाती हैं, तो पहली ही बारिश में बिजली आपूर्ति क्यों ठप हो जाती है। लोगों ने विद्युत विभाग से स्थायी समाधान, पर्याप्त तकनीकी अमले की उपलब्धता और बेहतर मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि बरसात के मौसम में बार-बार होने वाली बिजली कटौती से आम जनता को राहत मिल सके।

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